Wednesday, July 6, 2022
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जेंडर बदलवा कर माँ बाप और बहनो के लिए लड़की से लड़का बन गयी, UP की लड़की की दिल दहला देने वाली कहानी

जेंडर बदलवा कर माँ बाप और बहनो के लिए लड़की से लड़का बन गयी, UP की लड़की की दिल दहला देने वाली कहानी

Gender change full process-सबसे पहला सवाल ये उठता है जिससे आजकल लोग खूब सर्च करते है की क्या अब भारत में लड़की से लड़का या लड़के से लड़की बना जा सकता है मतलब क्या जेंडर (Gender) हो सकता है तो इसका जवाब हां है की आजकल ये चीज़ संभव हो गयी है की कोई भी अपना जेंडर (Gender) बदलवा सकता है बहुत से लोग ये भी सर्च करते है की इसमें ख़र्चा कितना आता है तो आपकी जानकारी के लिए बता दे की जेंडर चेंज करने का ख़र्चा नार्मल देखे तो 2 लाख तक में हो जाता है डॉ. अश्विनी दास के अनुसार पुरुष से महिला बनने के लिए करीब 18 और महिला से पुरुष बनने के लिए करीब 33 चरणों से गुजरना पड़ता है जिसमे संबंधित व्यक्ति के लिंग के साथ ही उसके चेहरे, बाल, नाखून, हाव-भाव, हार्मोंस, कान का शेप तक भी बदल दिया जाता है वैसे यह प्रॉसेस काफी खर्चीली हैं, लेकिन अगर कोई सारी चीजे नहीं करना चाहता है और इनमें से प्रमुख चरणों को ही कराता हैं, तो इसमें दो से ढाई लाख रुपए तक में जेंडर चेंज हो जाता है.

उम्र (age) कितनी होनी चाहिए- ये भी लोगो के जहन में एक प्रश्न होता है तो जेंडर (Gender) चेंज के लिए उम्र कितनी होनी चाहिए तो इसके लिए उम्र 20 साल रखी गयी है लेकिन अगर कोई 20 साल से कम उम्र में कराना चाहता है तो उसके माता पिता की लिखित में सहमति चाहिए.

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ऑपरेशन के दौरान किन अंगों में बदलाव किया जाता है
जेंडर चेंज करना एक लंबी प्रक्रिया होती है जो तकरीबन 5-7 घंटे तक चलती है इस दौरान ब्रेस्ट, जननांगों और चेहरे पर काम किया जाता है.लेकिन ऑपरेशन से 4-5 महीने पहले से दवाई शुरू हो जाती है जिससे हार्मोन बदलने लगते है जैसे आवाज बदलन चेहरे से लड़की बन रही है तो बाल हटना, या लड़का बन रही है तो दादी मूछ का आना, जैसी प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

सबसे अहम सवाल जिससे जेंडर चेंज करने वाले लोग जानना चाहते है की जेंडर चेंज के बाद माँ या पिता बना जा सकता है तो इसका जवाब ना ही होगा क्यों की ये अभी तक सम्भव नहीं हुआ है इसके लिए या तो उन्हें बच्चा गोद लेना होगा या फिर सरोगेसी का सहारा लेना होगा है इसमें आप अपने पार्टनर के साथ संबंध नार्मल इंसान की तरह बना सकते है बस बच्चा पैदा नहीं कर सकते है.

अब बात करते है 20 साल की निर्मला (बदला हुआ नाम), की जो 5 बहनों में सबसे बड़ी है और हमेशा से उसके माता-पिता की ख्वाहिश थी कि उनके भी एक बेटा हो, जिससे उनका वंश आगे बढ़ सके लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इस वजह से बहुत सी बार बेटा नहीं होने के गम में उनकी आंखें भी भर आती थीं लेकिन उनका ये रोना बड़ी बेटी निर्मला से देखा नहीं गया और आखिरकार निर्मला ने उनका दर्द दूर करने का फैसला किया और जेंडर बदलवाकर लड़की से लड़का बन गयी इसमें उससे ज्यादा नहीं मात्र 10 दिन का समय लगा और इसमें उसका सहयोग किया मेरठ के सरदार वल्लभभाई पटेल मेडिकल हॉस्पिटल ने जहाँ निर्मला लड़की से लड़का बन गयी.

मैं नहीं चाहती थी मेरा परिवार टूटे, इसलिए जेंडर बदलवा लिया ‘
निर्मला कहती है, ‘बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते मेरा फर्ज है कि मैं घर की जिम्मेदारी पूरी तरह निभाऊं और माँ बाप को बेटा और बहनो को भाई चाहिए था तो मुझे पहचान बदलनी पड़ी है। मैं नहीं चाहती थी कि हमारा हंसता-खेलता परिवार बेटे की चाह में रोता रहे तब मुझे लड़की का शरीर छोड़कर लड़का बनना पड़ा। बेशक मैं एक लड़की पैदा हुई थी, लेकिन मैं इस फैसले से खुश हूं क्योंकि आज मेरे मां-बाप को बेटा और बहनों को भाई मिल चुका है’।

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सहेलियों से भी कहा- ‘अपना भाई मुझे दे दो’ जिससे मेरा भी भाई हो जाये
निर्मला कहती है, हर बार मेरे घर बहन पैदा होती थी, भाई नहीं आया। लोग दहेज की बात कहकर हमें माता पिता पर बोझ बताते थे और कहा करते थे तुम्हारा वंश कैसे चलेगा इससे माँ पापा दुखी रहने लगे रोज उन्हें किसी ना किसी के ताने सुनने पड़ते थे और अब तो पापा की दूसरी शादी करने तक की बाते कहने लगे थे तो मेरा डर और बढ़ने लगा था इससे मम्मी और हम सभी बहनें सहम जाया करते थे.
लेकिन पापा हमसे बहुत प्यार करते हैं, इसलिए कभी भी उन्होंने किसी की भी बात पर ध्यान नहीं दिया हम सभी दिन रात भगवान से प्रार्थना करती कि हमारे घर भी लड़का पैदा हो जाये मैंने अपनी सहेलियों से भी कहा कि वो अपना भाई मुझे दे दें बहुत सी संस्थाओं में भी तलाश की की लड़का मिल जाये तो गोद ले लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पहनावे ऐसा पहनती थी की आधा बेटा बन गयी थी, अब पूरा बन गई
लड़को जैसे कपड़े पहनना हो या लड़को जैसे चलना उठना बैठना या फिर घर में लड़कों के काम करना बहनों से राखी बंधवाकर मैं लड़के जैसी बन गई, लेकिन इससे भी कुछ कमी रह गयी थी लगभग डेढ़ साल पहले मुझे जेंडर चेंज कराने के लिए सर्जरी का पता चला और फिर मैने भी तय किया कि अब मैं पूरा बेटा बनूंगी मैंने इस बारे में मम्मी-पापा से बात की तो ,पहले उन्होंने मना कर दिया बोले कि ये गलत है, हम तुझे नहीं खो सकते तब मैंने कहा मैं तो अभी भी लड़कों जैसे रहती हूं, फिर पूरा लड़का बनने में हर्ज क्या है। काफी दिनों की बातचीत के बाद मम्मी-पापा मान गए और अब मैने जेंडर चेंज का फैसला लिया और प्रशासन की परमिशन लेकर ये सर्जरी करा ली अब मैं पूरा लड़का बन चुकी हूं, और अपने घर का अकेला बेटा भी.

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लड़का तो बन गई लेकिन कभी पिता नहीं बन पाउँगा
हॉस्पिटल में लड़की से लड़का बनने का प्रोसेस लगभग 5 महीने तक चला। 4 महीने तक डॉक्टर्स ने लड़की से लड़का बनने के लिए हार्मोन चेंज करने की दवाई दीं जिससे उसे दाढ़ी-मूंछ आ सकें और आवाज़ भी लड़को की तरह भारी हो सके लड़की से लड़के के बदलाव को स्वीकार करने के लिए उसकी 5 महीनों से काउंसिलिंग भी कराई गयी हार्मोन चेंज होने के बाद लड़की की जेंडर चेंज कराने वाली सर्जरी की गयी जो 8 घंटे तक चली सर्जरी में उसके बाएं हाथ की मोटी खाल और नसों की मदद से लड़कों के जननांग को बनाकर उसमें रोपित किया गया हार्मोन चेंज की दवाइयाँ अभी भी चलती रहेंगी। डॉक्टर के अनुसार वो लड़की तो बन गई है लेकिन वो कभी बाप नहीं बन पायेगा निर्मला की इस कहानी से यही लगता है की भारत ,में आज भी बहुत सी ऐसी जगह है जहाँ लड़की को बोझ समझा जाता है.

Nandini Yadav
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